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प्रेम क्या है ‘प्रेम की परिभाषा क्या है 'prem' pyar kya hai

प्रेम क्या है ‘प्रेम की परिभाषा क्या है 'prem' pyar kya hai

प्रेम क्या है ‘प्रेम की परिभाषा क्या है 'prem' pyar kya hai

प्रेम क्या है ‘प्रेम की परिभाषा क्या है 'prem' pyar kya hai. हमारे आस-पास के वृक्ष पौधे ये सब देख रहे हैं। ना ये हैं न सुंदर। क्योंकि आपने इन्हें देखा है। इसी प्रकार जब प्रेम की बात आती है। लोग किसी का मुख स्मरण कर लेते हैं। ऐसी आँखें, वैसी मुस्कान, तिरछी, भ्रुकुट, घने केश। क्या यही प्यार का अस्तित्व है। नहीं यह उस शरीर का अस्तित्व है। जिसे हमारी आंखों ने देखा और हमने स्वीकार करलिया। परंतु प्यार।।। प्रेम उस वायु की भांति है जो हमें दिखाई नहीं देती। किंतु हमें जीवन देता है। 

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संसार किसी स्त्री को कुरूप कह सकता है। क्योंकि वह उस स्त्री को अपनी तन की आंखों से देखता है। परन्तु संतान उसी माता को संसार में सबसे सुन्दर समझता है। तन की आँखों से देखोगे तो 

जब भी प्यार की बात आती है। हम सबसे पहले मन में एक नायक और एक नायिका का चित्रण कर लेते हैं। क्यों आपके साथ भी यही होता है ना। क्या 

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सखा मित्रों से हो सकता है। देश और जन्मभूमि के लिए हो सकता है। मानवता के लिए हो सकता है। किसी कला  के लिए हो सकता है।इस प्रकृति के लिए हो सकता है।

प्यार कभी उस पन्ने पर लिखा ही नहीं जा सकता। जिस पर पहले ही बहुत कुछ लिखा हो। भरी मटकी में और पानी आ ही नहीं सकता। यदि 

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प्यार संसार का सबसे पवित्र बंधन है। पर सच पूछो तो यह बंधन से मुक्ति है। स्वतंत्रता है। नहीं समझे यदि कोई आपका प्रेम ठुकरा दे। यदि कोई आपका प्यार समझ ही ना पाए। तो क्या होगा। कुछ उदास हो जाएंगे। कुछ चल करके प्यार पाना चाहेंगे। तो कुछ बलपूर्वक
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प्रेम वह सकती है जो हर बंधन तोड़ सकती है। किंतु स्वयं किसी बंधन में नहीं फंसती। जिससे भी आप प्यार करते हो। उसे स्वतंत्र छोड़ दीजिये। क्योंकि स्वतंत्रता ही वह भाग है। जो जिव को सबसे अधिक प्रिय है।

हमें रिलेशनशिप में जाना चाहिए या नहीं।

प्यार क्या है। जब रिलेशनशिप में इतनी प्रॉब्लम है। तो इससे अच्छा तो यह है। कि हम किसी रिलेशनशिप में जाएं ही नहीं। हमें रिलेशनशिप में जाना चाहिए या नहीं। प्यार का एक अंधेरा पहलू भी होता है और प्यार का एक उज्ज्वल पक्ष भी होता है। एक प्यार वह जो आपने सुन रखा है। जो आप फिल्मों में देखते हैं। जो आप किस्से कहानियों में पढ़ते और सुनते हैं।
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और एक प्यार वह जो फिल्मी दुनिया से बिल्कुल अलग होता है। जिसकी सच्चाई बिल्कुल अलग होती है। जैसा आप फिल्मों में देखते हैं। कि सब कुछ आसानी से हो जाता है मिल जाता है। पर यह सच नहीं है कहीं ना कहीं फिल्मों की वजह से इन कहानियों की वजह से। आपके रिश्ते बहुत बिगड़ जाते हैं। क्योंकि आपके दिमाग में कुछ और होता है। लेकिन सच्चाई बिल्कुल अलग होती है।



फिल्मों में आप देखते हो अनकंडीशनल लव। और रियल लाइफ में ऐसा नहीं होता। सबसे पहली बात मैं आपको एक कड़वा सच सुना देता हूं। अनकंडीशनल लव आपको सिर्फ आपके पैरेंट्स ही कर सकते हैं। और कोई नहीं कर सकता। और आजकल तो ऐसा समय आ गया है। कुछ लोग बताते हैं कि उनके पैरेंट्स भी अपने




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पर जहां आप अपने जीवन साथी से अपने पार्टनर से अनकंडीशनल लव चाहते हैं। वहीं सब गड़बड़ हो जाता है। चाहे आपकी वाइफ/हस्बैंड हो। चाहे आपका किसी से

एक वाइफ को अपने हसबैंड के लिए बहुत कुछ करना पड़ता है। तभी उनका रिलेशन अच्छे से चलता है। एक रिलेशनशिप में जब आप अच्छा पर फॉर्म करेंगे। तभी वह रिलेशनशिप आपके लिए अच्छा परफॉर्म करेगा। अगर आप रिलेशनशिप में अच्छा पर फॉर्म नहीं कर रहे। आपका रिश्ता आपके लिए कभी अच्छा नहीं हो सकता। और जिस से आप
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आप इसे थोड़ा गहराई से समझना। बहुत सारी बातें हैं। आपको कोई अच्छा लगता है। तो वह अट्रैक्शन का लेवल होता है। आकर्षण का लेवल होता है। कोई अच्छा लगता है फिर उससे थोड़ा गहरा अटैचमेंट का लेवल होता है। जहां पर आपका दिल किसी से जुड़ने लगता है। जिसके साथ आते हैं सारी बातें शेयर करते हैं। उससे भी डीप होता है। एडिक्शन। जहां पर वह इंसान आपको चाहिए ही चाहिए।

प्रेम की परिभाषा क्या है

और जब वो इंसान को नहीं मिलता। तब आप फास्ट्रेड होने लगते हैं। इंसान आपको नहीं मिलता तो आपके रिलेशनशिप में प्रॉब्लम्स आना शुरू हो जाती हैं। तब आप को डाउट होना ना शुरू हो जाते हैं। तब तक कुछ मिस मैच हो जाता है। आपको धोखा भी मिल सकता है। और यह भी हो सकता है। कि वह इंसान आपकी किसी बात से बहुत नाराज़ होकर के आपको छोड़कर भी जा सकता है।

इन बातों की वजह से हमें रिश्ता ही नहीं रखना चाहिए। ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। हर इंसान एक जैसा नहीं होता। अब मैं आपको बताता हूं। जब

चाहे कितना ही बड़ा बिज़नेस कर रहे हो। अगर आपके पास आपकी जिंदगी में। एक ऐसा इंसान हो जो हमेशा आपको महसूस कराएं आप कितने अच्छे हैं। जो आपको यह महसूस कराएं कि वह हमेशा आपका साथ देगा। आपको छोड़कर कभी नहीं जाएगा। तो यह सारी चीजें ना होने के बाद भी खुश रह सकते हैं। प्रॉब्लम रिलेशनशिप में नहीं है। प्रॉब्लम यह है की आजकल लोगों को रिलेशनशिप हैंडल करना आता ही नहीं है। लोगों को यह बहुत अच्छा लगता है।


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प्रेम क्या है ‘प्रेम की परिभाषा क्या है 'prem' pyar kya hai

कि हमें कोई प्यार करता रहे। लेकिन जब उनकी बारी आती है प्यार करने की, साथ निभाने की। तो होता नहीं है। तो उन्हें लगता बहुत कठिन है। लोग तब सोचते हैं। की इससे अच्छा तो अकेले ही सही है। जैसे जिंदगी में सुख दुख आते हैं। जिंदगी में दुख आते हैं परेशानियां आती है। बुरा वक्त आता है तो जिंदगी में ख़ुशियाँ भी आती है। अच्छे पल भी आते हैं।

खुशी के पल भी आते हैं। रिश्ता भी ऐसे ही है। इसमें दोनों चीजें आती हैं। और जो इंसान रिश्तों से सिर्फ एक ही चीज चाहता है। कि सब कुछ अच्छा चलता रहे, मुझे प्यार मिलता रहे, मुझे खुशी मिलती रहे। तो वह इंसान किसी भी रिश्ते को सक्सेसफुली निभा ही नहीं सकता।

किंग वाली फीलिंग दे सकती है, क्वीन वाली फीलिंग दे सकती है। और प्यार ना हो तो हमलों में बैठा इंसान भी, खुद को कंगाल महसूस करता है।


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Prem ki paribhasha kya hai

छोटे बच्चे को आपने कभी देखा है। जब वह अपनी मां के साथ होता है ना। तो उसके सामने कोई पहलवान खड़ा हो जाए, उससे भी नहीं डरता। क्योंकि अपनी मां पर इतना विश्वास है। कि मेरी मां सबसे बचा लेगी।

सच तो यही है। कि प्यार से खूबसूरत दुनिया में और कुछ भी नहीं है। पर प्रेम की सबसे बड़ी बात देना ही देना है। लेने का नाम न लेना। प्यार ऐसी चीज है जहां आपको देना ही देना पड़ता है। जहां लेने का भाव आ जाता है। वह


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जो

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यह दुनिया उस बगीचे की तरह है। जहां फूल अलग-अलग होते हैं। जहां आपको काँटे भी मिलेंगे फूल भी मिलेंगे। आप सच्चे हैं आपको विश्वास रखना होगा। आपके जीवन में भी राइट/सही इंसान एक दिन जरूरत आएगा। जो आपको

जब किसी गहरे रिश्ते के बाद कोई इंसान हमें छोड़ कर चला जाता है। 
या किसी से ब्रेक अप हो जाता है तो क्या वह इंसान हमें याद करता है या नहीं।
उस इंसान को हमारी कदर होती है या नहीं।

दोस्तों। जब कोई इंसान आपकी जिंदगी से चला जाता है। या आपके साथ रिश्ता तोड़ देता है। तब सवाल यह नहीं होता कि वह क्या सोच रहा है। वह क्या कर रहा है। अब सवाल यह होता है। कि आप क्या कर रहे हैं, क्या आपने अभी तक अपने बारे में सोचना शुरू किया या नहीं। या अभी भी वहीं अटके हैं। तो सबसे पहले तो यह जरूरी है कि आप क्या सोच रहे हैं। और जब किसी के साथ आपका रिश्ता खत्म हो गया। वह क्या सोचता है, वह क्या करता है। आपका क्या मतलब उससे।

अगर आपने उसे दिल से चाहा। फिर भी उसने आपको छोड़ा। तो ये  बिल्कुल सही नहीं कि आप उसके बारे में सोचें। अब आप का हक बनता है। खुद की जिंदगी, आप अपने बारे में सोचें। क्योंकि आपने उसे अपना मन। दिलों जान उसपे लुटा दया। फिर भी वह इंसान आपसे अपना हाथ छुड़ा कर चला गया। और आप अभी भी यही सोच रहे हैं। कि वह क्या सोचता है, वह क्या सोच रहा है यह। आप मत सोचो। अब आपको क्या करना है। आप यह सोचो। 

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वह मुझे मिस करती/करता  है या नहीं। तो मैं आपको बता दूँ। जब भी आपका किसी के साथ रिस्ता टूटता है। पहले चरण में शुरू-शुरू में वह इंसान ख़ुशी महसूस करता है। उस इंसान को यह लगता है, कि मैंने रोज-रोज की झंझट को हटा के सही डिसीजन ले लिया। उसे बहुत रिलैक्स फील होता है, कि मैंने सही समय पर सही फैसला ले लिया।   किसी का किसी को ज्यादा प्यार दिखाना कहीं ना कहीं मन में डर पैदा कर देता है। और जब तक उसको आपका इतना प्यार मिलता रहता है। जब तक इतना अटेंशन। इतनी केयर उसे मिलेगा। तब तक 
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उसे समझ ही नहीं आता कि आप उसके लिए क्या है। क्योंकि आप उससे थोड़ी देर के लिए भी दूर नहीं होते। उसे जब जरूरत होती। आप तो रहते/रहती है।   तो उसे अहसास ही नहीं होता। यह सच है वह आपको मिस करता है। पर एकदम से नहीं सबसे पहले तो उसे अच्छा महसूस होता है। कि वह आजाद हो गया। या वह आजाद हो गई, लेकिन जब उसे वह सारी चीज से मिलना बंद हो जाता है। तब वह आपको मिस करना शुरू करता है। अगर आप किसी के साथ सीरियस रिलेशनशिप में थे। उसको आपसे सच्चा प्यार होगा तो। डेफिनेटली आपको मिस करेगा।  

आप दोनों की अंडरस्टैंडिंग मैच नहीं करती।

  ऐसा तब होता है जब। दोनों में से कोई एक इंसान चिट करता है। या झूठ बोलता है या दोनों एक दूसरे के साथ सीरियसली दिल से कमिटेड नहीं है। बहुत सारी चीज है बट हां किसी रिश्ते को टूटने से कैसे बचाना है। तो दो चीजें बहुत जरूरी है। दो बड़ी ग़लतियाँ जिसकी वजह से कभी-कभी सीरियस रिलेशनशिप भी टूट जाते हैं। कभी कभी ऐसी भी रिश्ते टूट जाते हैं, जहां दोनों तरफ से प्यार होता है।

पहली गलती सामने वाले को स्पेशल फील नहीं करा ना। वह वेल्यू नहीं देना  जो उसे मिलनी चाहिए। आजकल क्या होता है। जब आप किसी के साथ रिलेशनशिप में जाते हैं। तो आप उस इंसान को टेकन फॉर ग्रांटेड लेने लगते हैं। इंसान कभी मुझे छोड़कर नहीं जाएगा। और दूसरा इंसान तड़पता रहता है, तड़पता रहता है। और आखिरकार उस इंसान को आपके बिना रहने की आदत हो जाती है।


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आप चाहो या ना चाहो उसे वैसे ही बाहर निकल जाता है। अगर आप किसी को सच में प्यार करते हो ना। तो उसे महसूस कर आओ कि उस से बढ़कर आपके लिए कुछ भी नहीं, कोई भी नहीं। क्योंकि जब किसी से

प्रेम क्या है ‘प्रेम की परिभाषा क्या है’ ‘pyar kya hai’ prem ki paribhasha kya hai

आपके रिश्ते का दम घुटने लगता है। इसलिए कभी भी रिश्तो में यह मिस्टेक ना करें। उसे पाने की कोशिश बिल्कुल ना करें। ऐसा करो वैसा करो मुझे टाइम दो मेरे लिए यह करो। वह नहीं करो। मुझे अच्छा नहीं लगता। मुझे वह अच्छा नहीं लगता। यह सारी चीजें अगर आप करेंगे। तो एक बहुत अच्छे रिश्ते को भी आप हाथ से गंवा सकते हैं। जरूरी नहीं कि हमेशा सामने वाले की लगती हो।
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आप की ग़लतियों की वजह से भी रिश्ते टूट जाते हैं। हम यह तो कहते कि उसने मुझे छोड़ दिया, उसने मुझसे रिश्ता तोड़ दिया। कि सामने वाला इंसान बेवफा हो गया/गई। गलती आपकी भी होती है, आप हमेशा ध्यान रखें। अगर आप चाहते हैं। आप उस इंसान को हमेशा स्पेशल और वैल्युएबल फील कराए।

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